शनिवार, 10 अगस्त 2013

इक पेड़ लगा दो

माँ तुम अब के सावन की रुत

आँगन में इक पेड़ लगा दो

नहीं चाहता खेल खिलौने

बस छोटा सा पेड़ लगा दो


शोर मचाते मोटर बन्दर

अब नहीं जीतते मेरा मन

मशीनगन का नहीं फायदा

टैंकों ने कब जीते दुश्मन

बैठे जिस पर चिड़िया चुनमुन

ऐसा सुन्दर पेड़  लगा दो



हरा रंग सबको हर्षाये

खिले फूल राही ललचाये

खुशबू अपने आँगन फैले

ठंडी छाया सब सुख पायें

कभी न झगड़ा करने वाला


इक प्यारा सा दोस्त बना दो 

शुक्रवार, 21 जून 2013

फर्ज निभाएं


                                      

इक कालीन कहीं मिल जाए

सैर गगन की हम कर आयें

उड़नखटोला लेकर मित्रों

फूलों की घाटी तक जाएँ


रंग बिरंगे फूल खिले हों

गुंजन भँवरे भी करते हों

बुलबुल मीठा गान सुनाती

अठखेली पंछी करते हों


तितली रस फूलों से लाये

सौरभ सबका मन हर्षाये

नन्हा सा इक बीज उगाकर

हम भी अपना फर्ज निभाएं  



चित्र गूगल से साभार