बुधवार, 30 नवंबर 2011

चुहिया और बिल्ली

ताम ताम ते तत ते तानी
मैं तो हूँ शैतान की नानी
पूंछ उठाकर छम छम नाचे
छोटी नटखट चुहिया रानी

नीचे ऊपर ऊपर नीचे
चादर ताने परदे खींचे
लगा के ऐनक ऐसे बैठे
जैसे कोई चिट्ठी बांचे

दूर से बिल्ली देख  रही थी
पलकें झप झप झपक रही थी
कैसे पकडूँ कैसे झपटूँ
बैठी बैठी सोच रही थी

दोहराऊँगी वही कहानी
भूल जायेगी सब शैतानी
मैं तो ठहरी शेर की मौसी
याद आएगी तुझ को नानी

समझ न मुझको सीढ़ी सादी
देखी न होगी मुझ सी आंधी
बुजुर्गों ने भी मानी  हार
किसने मेरे घंटी बाँधी

ताम ताम ते तत ते तानी
बेशक तू शैतान की नानी
लेकिन मैं तुझसे भी सयानी
मेरा नहीं है कोई सानी


27 टिप्‍पणियां:

  1. मैं तो ठहरी शेर की मौसी
    याद आएगी तुझको नानी ...

    मनोरंजन के साथ-साथ
    कहीं न कहीं सीख भी मिल जाती है
    कई नन्ही कविताओं में .

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  2. बहुत ही प्यारी कविता।
    ----

    कल 02/12/2011को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  3. प्यारी...बहुत प्यारी..ये चूहे बिल्ली की कहानी

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  4. प्यारी कविता पढकर मजा आ गया...
    सादर..

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  5. बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति । मेर नए पोस्ट पर आकर मेरा मनोबल बढ़एं । धन्यवाद ।

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  6. सुन्दर प्रस्तुति | मेरे नए पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।

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  7. अरे ! इतना सुन्दर ब्लाग मैंने पहली बार देखा . आपकी रचनाएँ बाल मन के अनुरूप हैं. मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए.
    लारी लप्पा गायेंगे

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  8. वाह .. इतनी मोहक बाल कविता ... मज़ा आ गया ...

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  9. .


    सुंदर बाल कविता है … बधाई !

    आपकी रचनाएं बाल मनोविज्ञान को समझते हुए सृजित की गई प्रतीत होती हैं …


    आभार, बधाई और मंगलकामनाओं सहित…
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  10. बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ।
    मेरा शौक
    मेरे पोस्ट में आपका इंतजार है
    आज रिश्ता सब का पैसे से

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  11. बड़ी पुरानी किंतु सुहानी
    चूहे-बिल्ली की ये कहानी.
    सुंदर इसमें लगा तराना
    ताम ताम ते तत तत ताना....

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  12. आपका पोस्ट अच्छा लगा । मेरे नए पोस्ट "खुशवंत सिंह" पर आपकी प्रतिक्रियायों की आतुरता से प्रतीक्षा रहेगी । धन्यवाद ।

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  13. पहली बार आपके ब्लॉग से परिचय हुआ. बाल साहित्य को जिस गंभीरता से आपने छुआ है, आश्वस्ति हुई कि बच्चों के लिए अच्छी कविताएँ लिखी जाती रहेंगी.

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  14. ताम ताम ते तत ते तानी

    आपकी सुन्दर कविता ने तो मेरा दिल ही चुरा लिया है.

    सुन्दर प्रस्तुति के लिए बहुत बहुत आभार.

    मेरे ब्लॉग पर आईयेगा,वंदना जी.

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  15. लाजवाब रचना !
    आपकी रचनाओं में अद्भुत प्रतिभा की झलक दिखती है ।

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  16. लाजवाब रचना !
    रचनाओं मे आपकी बहुआयामी chhamata प्रदर्शित हो रही है।

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