रविवार, 2 अक्टूबर 2011

तितली


दूर देश से आई तितली
खबर बहुत सी लायी तितली

कानों को वो छूकर बोली
फूलों से मैं करूँ ठिठोली
सोचा मैनें दोस्त बना लूं
बैठ गयी चुपचाप हथेली

अपनी उसने कथा सुनाई
बागों में थी धूम मचाई
पुष्पों से लेकर मकरंद
खुशी से फूली न समाई

खिलें परस से उसके कलियाँ
बाग बगीचे जंगल गलियां
इन्द्रधनुष धरती पर छाये
आएँ जब जब तितली सखियाँ



15 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर भाव एवं शब्द संयोजन ....लाजबाब ..!

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  2. बाल कविता अच्छी कविता । मेरे पोस्ट पर आपका स्वागत है । धन्यवाद ।

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  3. मोहक रंगों से सजी तितली और तितली की कविता .... सुन्दर है ...

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  4. तितली और और उसकी ख़बरें. एक खूबसूरत और मनमोहक प्रस्तुति.

    आपको व आपके परिवार को विजयादशमी की ढेर सारी शुभकामनायें.

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  5. कविता लिखना कठिन है और बाल कविता लिखना उससे भी कठिन है। तितली पर बहुत अचछी बाल कविता आप ने लिखी है।

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  6. प्यारी-प्यारी सी बाल कविता....

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  7. बहुत सुन्दर , सार्थक प्रस्तुति,आभार.

    कृपया मेरे ब्लॉग पर भी पधारने का कष्ट करें .

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  8. mere blog par aap aai usi se apke blog ka pata chala..aabhari hoon.jud rahi hoon aapke blog se..milti rahungi.

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  9. bahut achhi rachna titli ke bhaawon ko sampreshit karti hui,badhaai!

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  10. वाह! बचपन में वो तितलियों के पीछे भागना याद आ गया!

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