बुधवार, 2 फ़रवरी 2011

भोर


सतरंगे पंखों पर आया

सोने का मोर

मुर्गे की बांग संग गूंजा

चिड़ियों का शोर



अलसाई हर टहनी डोली

गुड़िया ने भी आँखे खोली

पात पांत से तितली बोली

पुष्पन चहुँ ओर


भँवरो ने भी तान मिलाई

हर क्यारी गूंजी शहनाई

सूर्य जी बन आये सिपाही

तिमिर हुआ चोर



छुट्टी हो तो कसरत करना

देर तक किन्तु तुम ना सोना

दिन प्यारा सा आज बनाना

कहती है भोर


सतरंगे पंखो पर आया

सोने का मोर

गुरुवार, 2 सितंबर 2010

एक कहानी

अलबेली सी एक अजानी
नानी क्यों न कहो कहानी

रंग-बिरंगी परियों वाली
नन्ही राजकुमारी प्यारी
या बौनों की दुनिया न्यारी
नानी कह दो एक कहानी

आता होगा चंदा रथ पर
भरे पोटली खुशियाँ लेकर
ले आऊँ थाली में पानी
नानी कह दो एक कहानी

छुपी हुई फूलों में परियां
बिखराएँ हंसी की लड़ियाँ
बगिया में करती मनमानी
कह दो नानी एक कहानी

सपने सजे ,मस्ती भरपूर
और भारी बस्तों से दूर
छू मंतर हो जहाँ उदासी
कह दो नानी एक कहानी

महल सुनहरा सुन्दर प्यारा
देश कहीं दुनिया से न्यारा
खेले तारे आँख मिचौली
कह दो नानी एक कहानी