शुक्रवार, 13 अप्रैल 2012

मच्छर जी


गुनगुन करते गीत सुनाते
बिना बात सिर पर चढ़ जाते
गगन तले व नदी किनारे
रहें पार्क में साथ हमारे

सुई लगाता बनकर डॉक्टर
बीमारी दे जाता अक्सर
साढ़े तीन हैं नाम में अक्षर
जी हाँ दादू वो हैं मच्छर

दादी को मैनें बतलाया
मजबूत इक किला बनवाया
द्वार नहीं पर कई झरोखे
लेकिन मच्छर इक न झाँके

सुन लो मच्छर तुम थे ज्ञानी
हम ले आये मच्छरदानी
अब कितना भी शोर मचाओ
दूर खेलो पास ना आओ  


सोमवार, 12 मार्च 2012

पर्यायवाची

आ गए परीक्षा के दिन... तो याद करने के लिये अपनाएं कुछ मजेदार तरीके
जैसे-



पर्यायवाची
1
भूमि धरती मही धरणी
पृथ्वी के हैं नाम सभी
2
नदी पार ले जाये जो
नौका नाव तरी तरणी
3
रात्रि रात निशा यामिनी 
रजनी या फिर विभावरी
4
मत्स्य मीन मकर शफरी
जल बिन तडपे रे मछली
5
कुंजर नाग मतंग करी
गज हाथी कि कहें दंती
6
उत्पल पद्म नलिन पंकज
जल उगे कमल कहो जलज

7
नीरद बादल जलद जलधर
इन्हें देख खुश हो हलधर

8
रम्य ललित मंजुल सुन्दर
अच्छा लगे कहें मनहर  
9
कमल जलज पंकज अम्बुज
शतदल उत्पल या नीरज
10
अंबु तोय वारिस नीर
जल कहलाता जीवन -क्षीर