रविवार, 27 मार्च 2011

हिचकी

हिचहिच हिचक जब आई हिचकी

परेशान हुई नन्हीं पिंकी

कहने लगी वह दादी माँ से

खाऊं क्या दही दूध बताशे

पानी काफी सारा पी लिया

नाम न इसने रुकने का लिया

नानी को तेरी याद आई

उत्तर दिया दादी मुस्काई

दादाजी सुनते थे सब बात

आओ बतलायें असली राज

डायफ्राम फेफड़ों के नीचे

सांस ले अंदर बाहर भेजे

फैलता सिकुड़ता फिर फैलता

यह सब निश्चित ताल में चलता

कभी अचानक सिकुड यह जाए

श्वास खिंचे आवाज़ जो आये

इसे ही तब हिचकी कहते हैं

फिर सांस गहरी लेते हैं

या पल भर रोक जो लेते हैं

मुक्त हिचकी से हो जातें हैं

4 टिप्‍पणियां:

  1. सांस अंदर लेने से उतकों की कठोर परतों से बना, वक्षस्थल के निचले हिस्से में स्थित, 'डायाफ़्राम' पेट की ओर संकुचित हो फेफडों में हवा भरने देता है। इससे भोजन को श्वास नली में जाने से रोकने वाला 'एपिग्लाटिस' और वाक तंतुओं का प्रवेशद्वार 'ग्लाटिस' दोनो खुल जाते हैं। इस क्रिया में व्यवधान आने पर हिचकी शुरु हो जाती है।
    nice

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  2. बहुत प्यारा बल गीत बधाई और शुभकामनाएं वन्दना जी !

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  3. vandava ji
    jankaari se paripurn aapka pyaara sa bal geet bahut hi pyaara laga.
    ati sundar
    badhai
    poonam

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