शनिवार, 21 सितंबर 2013

चलो न दादू



नभ आँगन को छूकर चहकूँ, थामे हाथ तिहारा
नाजुक न्यारा हम दोनों का, रिश्ता दादू प्यारा
महावीर गौतम कोलंबस, सुनूँ सभी गाथाएं
ब्लॉग आपके लिखकर सीखूं, रसभीनी कवितायें
सभी जटिलताएं जीवन की, अनुभव से सुलझाना
कंप्यूटर पर हम ढूंढेंगे, कोई खास पुराना
विश्वास जगाता है हरदम, ये बाँहों का घेरा
मंदिर मस्जिद गिरिजाघर सम, गुरुद्वार तुम मेरा
चलो न दादू झूलों पर हम, ऐसे पेंग बढ़ाएं
सूरज चंदा बाँध पोटली, साध उजाले गायें 





चित्र गूगल से साभार 

शनिवार, 10 अगस्त 2013

इक पेड़ लगा दो

माँ तुम अब के सावन की रुत

आँगन में इक पेड़ लगा दो

नहीं चाहता खेल खिलौने

बस छोटा सा पेड़ लगा दो


शोर मचाते मोटर बन्दर

अब नहीं जीतते मेरा मन

मशीनगन का नहीं फायदा

टैंकों ने कब जीते दुश्मन

बैठे जिस पर चिड़िया चुनमुन

ऐसा सुन्दर पेड़  लगा दो



हरा रंग सबको हर्षाये

खिले फूल राही ललचाये

खुशबू अपने आँगन फैले

ठंडी छाया सब सुख पायें

कभी न झगड़ा करने वाला


इक प्यारा सा दोस्त बना दो