गुरुवार, 12 दिसंबर 2013

गुड़िया का ब्याह

सजी सजीली नन्हीं गुड़िया
शरमाई आफत की पुड़िया

मिल कर उसका ब्याह रचाया
मंडप प्यारा खूब सजाया

बजती है ढोलक शहनाई
मस्ती में बाराती भाई

पकवानों का दौर चलेगा
गायें नाचें रंग जमेगा

खेल सभी मिलकर खेलेंगे

कभी न प्यारे हम झगड़ेंगे 



छवि : गूगल से साभार 

रविवार, 24 नवंबर 2013

छाता मेरा




रंग बिरंगे फूल विराजे
एक टांग पर तिकधिन नाचे
जैसे गुडिया फ्रॉक निराला
मेरा छाता है मतवाला

बरखा से वो मुझे बचाये
भरी धूप माथा सहलाये
दादा जी का साथी सच्चा
लगता नाना को भी अच्छा

मोर नाचते जब उपवन में
इन्द्रधनुष सजते हैं नभ में
छाता मेरा मुझे बुलाये
गोल गोल घूमे इतराये


चित्र : गूगल से साभार