
देखो मेरी दोस्त गिलहरी
रची पीठ पर काली धारी
दो हाथों में पकड़ फलों को
लगती है वो कितनी प्यारी
नीचे ऊपर ऊपर नीचे
कूदे-फाँदे इत उत भागे
लंबी लंबी बड़ी भली सी
ब्रुश सी पूँछ गज़ब ही लागे
मैं चाहूँ संग मेरे खेले
खेल खिलौने सारे ले ले
फुर्ती अपनी दे दे थोड़ी
तो फिर मैं बन जाऊं ‘पेले’
मूँगफली उसको ललचाए
कुतर कुतर सारी खा जाये
पापा मम्मी से बोलूँगा
उसकी खातिर ले कर आयें
thanks to
यह गिलहरी तो बहुत प्यारी है. अच्छा लगा आपको पढना..बधाई !!
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शब्द-शिखर / विश्व जनसंख्या दिवस : बेटियों की टूटती 'आस्था'
बहुत सुंदर बालकविता,
जवाब देंहटाएंआभार,
विवेक जैन vivj2000.blogspot.com
वंदना जी ये तितली बड़ी प्यारी है-रंग बिरंगी न्यारी है -भ्रमर संग संग उड़ता जाता - मिले गिलहरी तो फल खाता
जवाब देंहटाएंसुन्दर मनमोहक बाल कविता बधाई हो
आभार आप का
शुक्ल भ्रमर ५
बाल झरोखा सत्यम की दुनिया
http://surenrashuklabhramar5satyam.blogspot.com
बहुत ही प्यारी रचना है ....आभार
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