रविवार, 2 सितंबर 2012

मेरी नैया


छपाछप छैया ताल तलैया
नाचूँ मैं और मेरा भैया
बनी तो यह कागज की लेकिन
मुझको प्यारी मेरी नैया    


बिन पानी तो चलती कैसे
डूब डूब उतराती कैसे
बिन मोटर और बिन पतवार
ठुमक ठुमक इतराती ऐसे


दूर देश की सैर करे हम
बाधाओं से नहीं डरें हम
ठानी मन में नया करें कुछ
बन कोलम्बस बढे कदम 

17 टिप्‍पणियां:


  1. बढ़िया बाल गीत अभिनव शब्द प्रयोग -छपाछप छैया .ताल तलइया........


    सोमवार, 3 सितम्बर 2012
    Protecting Your Vision from Diabetes Damage मधुमेह पुरानी पड़ जाने पर बीनाई को बचाए रखिये
    Protecting Your Vision from Diabetes Damage

    मधुमेह पुरानी पड़ जाने पर बीनाई को बचाए रखिये

    ?आखिर क्या ख़तरा हो सकता है मधुमेह से बीनाई को

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  2. बेहद सुन्दर कविता, बधाई
    (अरुन = www.arunsblog.in)

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  3. बहुत सुन्दर ... आशा का संचार करती ... लाजवाब बाल रचना ...

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  4. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार 4/9/12 को चर्चाकारा राजेश कुमारी द्वारा चर्चा मंच http://charchamanch.blogspot.inपर की जायेगी|

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  5. अरे वाह!

    आपकी नैय्या तो कमाल की है वंदनाजी.

    सुन्दर,मनमोहक और प्रेरक प्रस्तुति के लिए आभार.

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  6. बहुत प्यारी मासूम सी कविता बच्चों की तरह ...वाह

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  7. बच्चों सी चुलबुली रचना ...सुन्दर !

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  8. वंदना जी बहुत सुंदर बाल गीत हैं बच्चों के साथ बड़ो को भी पसंद आए ।

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  9. अपनी नैय्या में बैठ मेरे ब्लॉग पर आईएगा,वन्दना जी.

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  10. सुन्दर बहुत प्यारी सुर , लय ताल कि समभागी बेहद खूबसूरत |

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