बुधवार, 12 फ़रवरी 2014

घड़ी उपहार


राखी का था जब त्यौहार
घड़ी मिली मुझको उपहार

रंग अनोखा उसका लाल
मुझे उठाती प्रात:काल

कुकड़ू कूँ की देती टेर
कहती उठ जा होगी देर

घड़ी समय का देती ज्ञान
पलपल का रखना तुम ध्यान

समय बताती रहकर मौन
बूझो तो यह लाया कौन

भैया ने दी गुल्लक खोल

कहते बहना है अनमोल 





चित्र गूगल से साभार 

6 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज बृहस्पतिवार (13-02-2014) को दीवाने तो दीवाने होते हैं ( चर्चा - 1522 ) में "अद्यतन लिंक" पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    उत्तर देंहटाएं
  2. बड़ा ही सुन्दर उपहार
    हर समय भैया की याद दिलाएगी :-)

    उत्तर देंहटाएं
  3. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत ही प्यारी रचना. बच्चों के लिए लिखना बहुत मुश्किल होता है. आप उसे बखूबी कर रही हैं.

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति। । होली की हार्दिक बधाई।

    उत्तर देंहटाएं