रविवार, 25 जुलाई 2010

चंदा

प्यारा उड़नखटोला ले के
चंदा मेरे घर आयेगा
सैर गगन की मुझे कराने
संग अपने ले जायेगा।
बादल से है दौड़ लगाता
तारों से मिल, करे ठिठोली
पास बुलाकर मुझसे कहता
आ खेलेंगे आँख -मिचौली ।
टॉफी,लड्डू , खेल -खिलौने
लाकर मैं उसे दिखाऊंगा
जो देखें हैं सपने मैंने
वो सब उसे सुनाऊंगा ।
मुझ जैसा ही नटखट है वो
दोस्त मेरा बन जायेगा
मन से निर्मल शीतल है जो
प्यार का जादू सिखलाएगा ।
प्यारा उड़न खटोला ले के
चंदा मेरे घर आयेगा !


3 टिप्‍पणियां:

  1. कल 22/08/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  2. बाल मन की कोमल कल्पना की सहज अति सुन्दर प्रस्तुति ..हार्दिक शुभकामनाएं !!

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